WPL 2026: विमेंस प्रीमियर लीग के चौथे सीजन में ड्रामा अपनी चरम सीमा पर है. कल बीती रात खेले गए दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस के बीच मुकाबले में लिजेल ली के विकेट को लेकर हुए विवाद ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. अंपायर के फैसले से असंतुष्ट लिजेल ली न केवल मैदान पर रुकी रहीं, बल्कि उन्होंने अंपायर के पास जाकर अपना कड़ा विरोध भी दर्ज कराया.
क्या था वो ‘Controversial’ फैसला?
दिल्ली की पारी के 11वें ओवर में यह घटना घटी जब लिजेल ली 46 रन बनाकर खेल रही थीं. अमनजोत कौर ने लेग साइड पर गेंद डाली, जिस पर ली ने फ्लिक करने की कोशिश की लेकिन संतुलन खो बैठीं. मुंबई की विकेटकीपर राहिला फिरदौस ने बिजली की तेजी से स्टंपिंग की.
अंपायर ने फैसला तीसरे अंपायर को सौंपा. तीसरे अंपायर ने अलग-अलग एंगल और स्टंप कैमरा देखने में 5 मिनट से अधिक का समय लिया. अंततः यह पाया गया कि जब बेल्स गिरीं, तब ली का बल्ला हवा में था. लिजेल ली इस फैसले से बिल्कुल सहमत नहीं थीं. उन्होंने क्रीज पर ही अंपायर से बहस शुरू कर दी.
अंपायर से भिड़ गई ‘धाकड़’ खिलाड़ी
फैसला स्क्रीन पर आते ही लिजेल ली का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने क्रीज छोड़ने के बजाय अंपायर की ओर रुख किया. वीडियो में लिजेल ली को अंपायर से यह कहते हुए देखा गया कि गेंद काफी नीचे थी और स्टंप्स को मिस कर रही थी. उन्होंने काफी देर तक मैदान नहीं छोड़ा और लगातार अंपायर से बहस करती रहीं. आखिर में उन्हें शांत कर पवेलियन की ओर भेजना पड़ा. नियम क्या कहता है? आईसीसी और डब्ल्यूपीएल के नियमों के मुताबिक, अंपायर के फैसले के प्रति असंतोष व्यक्त करना आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है. मैच में ली ने 28 गेंदों में 46 रन की पारी खेली.
लिजेल ली पर गिरी गाज
मैच के बाद मैच रेफरी ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लिया है. लिजेल ली पर निम्नलिखित कार्रवाई की गई है. अंपायर के साथ बदतमीजी और बहस करने के लिए उन पर मैच फीस का 10% जुर्माना लगाया गया है. उन्हें डब्ल्यूपीएल आचार संहिता के आर्टिकल 2.8 (अंपायर के फैसले पर असंतोष दिखाना) के तहत दोषी पाया गया है और एक डीमेरिट पॉइन्ट दिया है.
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