EMI में राहत नहीं? दिसंबर में बढ़ती इकोनॉमी और कम महंगाई ने RBI की रणनीति उलझाई

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देश के दूसरी तिमाही के इकोनॉमिक ग्रोथ के आंकड़े सामने आ चुके हैं. सभी अनुमानों को धराशाई करते हुए देश की जीडीपी ग्रोथ 8 फीसदी से ज्यादा देखने को मिली है. वहीं दूसरी ओर अक्टूबर महीने की महंगाई रिकॉर्ड लोअर लेवल पर है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या आने वाले दिनों में देश का बैंकिंग रेगुलेटर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी 5 दिसंबर को रेपो रेट में कटौती का फैसला करेगी या नहीं. कई जानकारों का मानना है कि आरबीआई एमपीसी इस बार ब्याज दरों में कटौती को होल्ड पर रखेगा. साथ ही ब्याज दरों में कटौती बजट पेश होने के बाद देखने को मिल सकती है |

एक्सपर्ट का कहना है कि आरबीआई ने मौजूदा साल में जो एक फीसदी की कटौती की है, उसकी पूरी राहत आम लोगों तक नहीं पहुंची है. वहीं दूसरी ओर रेट कट इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए किया जाता है. दूसरी तिमाही की ग्रोथ 8 फीसदी से ज्यादा देखने को मिली है. अनुमान है कि तीसरी और चौथी तिमाही में भी देश की ग्रोथ 7.5 फीसदी से ज्यादा देखने को मिले. ऐसे में रेट कट में कटौती करने का कोई औचित्य नहीं है. हाल ही में देश के सबसे बड़े सरकारी लेंडर एसबीआई ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आरबीआई एमपीसी रेपो रेट को एक बार फिर होल्ड पर रख सकती है. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर आरबीआई रेपो रेट को लेकर जानकारों का क्या कहना है?

क्या आरबीआई फिर ले सकता है टफ कॉल?

केंद्रीय बैंक ने फरवरी से अब तक ब्याज दरों में 100 आधार अंकों (1 प्रतिशत अंक) की कटौती करके रेपो रेट को 5.50 फीसदी पर ला दिया है और अगस्त से इसमें कोई बदलाव नहीं किया है. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या बैंकों ने इसका पूरा फायदा आम लोगों तक पहुंचाया या नहीं. वास्तव में बकाया लोन पर ब्याज दरों में 54 बेसिस प्वाइंट की गिरावट आई है, जबकि बकाया डिपॉजिट्स पर ब्याज दरों में 20 आधार अंकों की गिरावट देखने को मिली है. वहीं दूसरी ओर नए लोन पर ब्याज दरों में 100 बेसिस प्वाइंट और नए डिपॉजिट्स पर 89 बेसिस प्वाइंट की कटौती देखने को मिली है. इन आंकड़ों से समझा जा सकता है सिर्फ नए लोन लेने वालों को आरबीआई के अब तक कट का फायदा मिल रहा है, ना कि दूसरे या पुराने लोगों को |

दो दिग्गजों ने किया अपने रुख में बदलाव

दो संस्थानों, जिन्होंने पहले ब्याज दरों में कटौती का अनुमान लगाया था, ने अपने रुख में बदलाव किया है. बार्कलेज और इक्रा रेटिंग्स ने फ्रेश जीडीपी आंकड़ों के जारी होने के बाद यह संशोधन किया और अब आरबीआई को यथास्थिति बनाए रखने के संकेत दे रहे हैं. दूसरी ओर, अर्थशास्त्री कम नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ, बढ़े हुए टैरिफ-संबंधी जोखिमों, अगले वित्तीय वर्ष में महंगाई के आरबीआई के अनुमानों से कम रहने की संभावना और “अभी नहीं, तो कब” की प्रचलित धारणा की ओर इशारा करते हैं |

बार्कलेज बैंक की भारत की मुख्य अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी ने कहा कि हमें अब आरबीआई की एमपीसी द्वारा आगामी बैठक में नीतिगत दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि शुक्रवार को वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर हमारी और आरबीआई की उम्मीदों से कहीं अधिक रही. हम मानते हैं कि विकास दर अपने चरम पर पहुंच गई है और उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में ग्रोथ रेट पहली छमाही की तुलना में धीमी रहेगी |

गुडवानी ने पहले महंगाई को “अनदेखा करने लायक बहुत कम” बताते हुए ब्याज दरों में कटौती की मांग की थी. वहीं दूसरी ओर आईडीएफसी फर्स्ट, बैंक ऑफ बड़ौदा, इकरा रेटिंग्स, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक, आरबीएल बैंक और बार्कलेज बैंक ने ब्याज दरों में बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया है |

ग्रोथ और महंगाई अनुमान से कम

जुलाई-सितंबर में आरबीआई के 6.8 फीसदी ग्रोथ रेट के अनुमान के विपरीत, भारतीय अर्थव्यवस्था 8.2 फीसदी बढ़ी, जो पिछली छह तिमाहियों में सबसे तेज थी. दूसरी तिमाही में नॉमिनल जीडीपी 8.7 फीसदी की दर से बढ़ी, जबकि पिछले वर्ष यह 8.8 फीसदी थी. इसके साथ ही, खुदरा महंगाई अक्टूबर में घटकर 0.25 फीसदी रह गई. यह 2015 में चालू सीरीज शुरू होने के बाद से सबसे कम है. आरबीआई ने वित्त वर्ष 26 के लिए 2.6 फीसदी, वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में 4 फीसदी और वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 4.5 फीसदी महंगाई का अनुमान लगाया है. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के अपने पूरे वर्ष के महंगाई अनुमान को फरवरी के 4.2 फीसदी से घटाकर 2.6 फीसदी कर दिया है |

इन्होंने दिया कटौती का संकेत

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 का अनुमानित महंगाई अनुमान अब 2 फीसदी से कम है, जिसका अर्थ है कि आरबीआई के वित्त वर्ष 26 के महंगाई अनुमान में लगभग 50-60 आधार अंकों की और कमी आने का जोखिम है. उन्होंने आगे कहा कि यह दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में हो सकता है. हालांकि, यह एक करीबी मुकाबला है. ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने भी यही राय व्यक्त की है. एचडीएफसी बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा कि वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में 8.7 फीसदी की नॉमिनल ग्रोथ रेट इस बात का संकेत है कि सावधानी बरतने की ज़रूरत है |

उन्होंने आगे कहा कि इस साल, ग्रोथ रेट के ज़्यादा रहने और महंगई के कम रहने की कहानी रही है. इसलिए, आरबीआई की आगामी ब्याज दरों पर फैसला लेना मुश्किल है. उन्हें लगता है कि ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की गुंजाइश है. इन दोनों के अलावा इंडसइंड बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, एक्सिस बैंक, क्रिसिल रेटिंग्स, एएनजी बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज पीडी, इंडिया रेटिंग्स, कोटक महिंद्रा ने भी ब्याज दरों में कटौती की बात कही है |

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