कंगाल पाकिस्तान ने अपनी साख बचाने के लिए अमेरिका के तलवे चाटने में खर्चे कर दिए अरबों

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इस्लामाबाद। एक तरफ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर है और आम जनता आटा-दाल जैसी बुनियादी चीजों के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि चमकाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहे हैं। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा किए गए हालिया खुलासे ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सैन्य नेतृत्व की पोल खोल दी है। दस्तावेजों से पता चला है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी साख बचाने और भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में भारी-भरकम लॉबिंग कराई है।
खुलासे के अनुसार, पाकिस्तान ने अपनी गरीब जनता की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिकी सांसदों और नीति-निर्धारकों को साधने में खर्च किया। पाकिस्तान ने वॉशिंगटन डीसी की प्रभावशाली लॉबिंग फर्म स्क्वायर पैटन बोग्स और राजनीतिक रूप से मजबूत पकड़ रखने वाली जैवेलिन एडवाइजर्स की सेवाएं लीं। जैवेलिन एडवाइजर्स को पाकिस्तान ने प्रति माह 50,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.40 करोड़ पाकिस्तानी रुपये) की भारी फीस पर नियुक्त किया था। इस फर्म का मुख्य काम अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के शीर्ष नेताओं तक पाकिस्तान का पक्ष पहुंचाना था। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान ने जिन लॉबिंग कंपनियों का सहारा लिया, उनका सीधा संबंध अमेरिकी सत्ता के गलियारों से है। जैवेलिन एडवाइजर्स के संस्थापकों में डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सहयोगी शामिल हैं। इन कंपनियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीनेट मेजॉरिटी लीडर जॉन थ्यून और हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज़ जैसे प्रभावशाली नेताओं के दफ्तरों से संपर्क साधा। इनका उद्देश्य पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता से इनकार करना और खुद को शांतिप्रिय देश के रूप में पेश करना था। रिकॉर्ड बताते हैं कि मई 2025 में अमेरिकी सांसदों और पाकिस्तान के राजदूत के बीच कॉल्स भी आयोजित कराई गईं ताकि भारत के साथ बढ़ते तनाव पर पाकिस्तान अपना एजेंडा सेट कर सके।
अमेरिकी न्याय विभाग में दर्ज जानकारी के मुताबिक, लॉबिंग फर्मों ने अमेरिकी सांसदों के बीच एक विवादित नोट भी बांटा। इस नोट में पाकिस्तान ने उलटा भारत पर ही अपनी सीमा के भीतर अस्थिरता फैलाने का आरोप मढ़ा और कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की मांग दोहराई। पाकिस्तान का प्रयास था कि अमेरिका इस मामले में हस्तक्षेप करे और उसे आतंकवाद के आरोपों से क्लीन चिट मिल जाए। इतना ही नहीं, इन फर्मों ने न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसे प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबारों के पत्रकारों से भी संपर्क किया ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पाकिस्तान के पक्ष में खबरें छपवाई जा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खुलासा पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। जहां एक ओर वह दुनिया के सामने कर्ज के लिए हाथ फैला रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए वह करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के दबाव के बाद पाकिस्तान की यह छटपटाहट दिखाती है कि वह कूटनीतिक मोर्चे पर कितना अलग-थलग पड़ चुका है। खुद को निर्दोष साबित करने की यह महंगी कोशिश अब पाकिस्तान के भीतर भी राजनीतिक विवाद का कारण बन सकती है।

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