सूर्यकुमार यादव बोले- सैमसन, किशन और युवा जोश से भारत बना चैंपियन

Date:

भारतीय टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने लगातार दो आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप जीतने के अनुभव को बेहद खास बताया है। उन्होंने कहा कि जब यह तय हुआ कि 2026 का टूर्नामेंट भारत में खेला जाएगा, तभी से टीम ने इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। सूर्यकुमार ने बताया कि टीम ने करीब 17-18 महीने पहले से ही अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी थी और खिलाड़ी भी इस चुनौती को लेकर काफी उत्साहित थे।

'अहमियत बाद में महसूस होगी'

भारतीय टी20 कप्तान ने कहा, 'लगातार दो वर्ल्ड कप जीतना अपने आप में शानदार अनुभव है। जब हमें पता चला कि यह वर्ल्ड कप भारत में खेला जाएगा, तब से ही हमने इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। खिलाड़ी काफी उत्साहित थे और हम सब जानते थे कि यह हमारे लिए कितना बड़ा मौका है।' उन्होंने आगे कहा कि युवा खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप जीतने की अहमियत समझाना भी जरूरी था। कप्तान ने कहा, 'मैंने खिलाड़ियों से कहा कि अभी जब वे 24-27 साल के हैं, तब शायद उन्हें इसकी पूरी अहमियत महसूस नहीं होगी। लेकिन जब वे अपने करियर के अंत में पीछे मुड़कर देखेंगे, तब समझ आएगा कि उन्होंने कितने वर्ल्ड कप जीते हैं।'
 
सैमसन का चयन बना टर्निंग पॉइंट

सूर्यकुमार यादव ने खुलासा किया कि टूर्नामेंट के दौरान टीम में संजू सैमसन को शामिल करना एक अहम रणनीतिक फैसला था, जिसने टीम की दिशा बदल दी। उन्होंने बताया कि उस समय टीम मैनेजमेंट को बल्लेबाजी क्रम में संतुलन की जरूरत महसूस हो रही थी और सैमसन का शामिल होना बिल्कुल सही समय पर लिया गया फैसला था। सूर्यकुमार ने कहा, 'सैमसन के टीम में आने के बाद मैच का रुख बदल गया। यह थोड़ा टैक्टिकल फैसला भी था क्योंकि टॉप ऑर्डर में दो-तीन लेफ्ट हैंडर बल्लेबाज थे। सैमसन का शामिल होना सही समय पर लिया गया फैसला था।'उन्होंने सैमसन की मेहनत की भी तारीफ की। सूर्यकुमार ने कहा, 'वह पर्दे के पीछे बहुत मेहनत कर रहे थे। किसी को पता नहीं था कि वह किस दौर से गुजर रहे थे। लेकिन पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह उन्होंने खेला, वह शानदार था और आखिरकार वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने।'
 
फाइनल में अभिषेक और सैमसन की आक्रामक शुरुआत

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में भारत की आक्रामक शुरुआत ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ा दिया था। खासकर अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की बल्लेबाजी ने डगआउट में सकारात्मक माहौल बना दिया। सूर्यकुमार ने बताया कि अभिषेक शर्मा पहले से ही इस बड़े मौके के लिए आत्मविश्वास से भरे हुए थे। उन्होंने कहा, 'अभिषेक हमेशा मुझसे कहता था, ‘पाजी चिंता मत करो, मैं आपके लिए वर्ल्ड कप जिताऊंगा और ऐसी पारी खेलूंगा जिसे आप हमेशा याद रखेंगे।’ उसके अंदर काफी सकारात्मकता थी और पूरी टीम उसका समर्थन कर रही थी।' उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को भरोसा था कि अभिषेक का बड़ा प्रदर्शन जल्द आने वाला है। सूर्यकुमार ने कहा, 'हमें पता था कि उसका समय आने वाला है और फाइनल से बेहतर मंच कोई नहीं हो सकता था।'
 
गौतम गंभीर के साथ खास रिश्ता

टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ अपने रिश्ते को लेकर भी सूर्यकुमार यादव ने दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं और उनके बीच बहस नहीं बल्कि चर्चा होती है। सूर्यकुमार ने कहा, 'यह बहस नहीं बल्कि चर्चा होती है। हम एक-दूसरे को करीब 12 साल से जानते हैं। 2014 में जब मैं केकेआर गया था, तब हमारा सफर शुरू हुआ।' उन्होंने यह भी बताया कि SKY (स्काई) नाम उन्हें गंभीर ने ही दिया था। सूर्यकुमार ने कहा, 'उन्होंने ही मुझे ‘SKY’ नाम दिया और 2015-16 के आसपास मुझे टीम का उप-कप्तान भी बनाया, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि भविष्य में मैं टीम का नेतृत्व कर सकता हूं। आज भी मैं उन्हें ‘गौति भाई’ ही कहकर बुलाता हूं।'सूर्यकुमार ने एक दिलचस्प किस्सा भी बताया कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान टीम ने कई बार गंभीर को हंसाने की कोशिश की। उन्होंने बताया, 'हमने कई बार उन्हें हंसाने की कोशिश की, लेकिन मैच इतने तीव्र थे कि वह ज्यादा मुस्कुराते नहीं थे। हालांकि फाइनल जीतने के बाद जब हमने उनके चेहरे पर मुस्कान देखी, तो सभी खिलाड़ी बेहद खुश हो गए।'
 
ईशान किशन के चयन की दिलचस्प कहानी

टी20 वर्ल्ड कप टीम में ईशान किशन को शामिल करने का फैसला भी काफी दिलचस्प रहा। सूर्यकुमार यादव ने बताया कि यह फैसला पूरी तरह डेटा पर नहीं बल्कि काफी हद तक उनके अनुभव और सहज निर्णय पर आधारित था। उन्होंने कहा कि इस फैसले से पहले टीम मैनेजमेंट के सामने मुश्किल स्थिति थी क्योंकि जितेश शर्मा भी लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। सूर्यकुमार ने कहा, 'यह फैसला काफी हद तक मेरे इंस्टिंक्ट पर आधारित था, हालांकि डेटा भी देखा गया था। जिटेश शर्मा को बाहर रखना काफी कठिन फैसला था क्योंकि वह पिछले डेढ़ साल से अच्छा खेल रहे थे।' उन्होंने बताया कि टीम को टॉप ऑर्डर में अतिरिक्त आक्रामकता और लेफ्ट–राइट कॉम्बिनेशन की जरूरत थी। सूर्यकुमार ने बताया, 'मैंने ईशान को फोन किया और पूछा- छोटू, वर्ल्ड कप जिताएगा? उसने जवाब दिया- भैया बस भरोसा करके देखिए। तब मैंने कहा- चल, किया भरोसा। और जिस तरह उसने खेल दिखाया, वह शानदार था।'
 
भारतीय टीम की फियरलेस सोच का राज

सूर्यकुमार यादव ने कहा कि आज भारतीय टीम जिस निडर क्रिकेट के लिए जानी जाती है, उसकी नींव कई पूर्व कप्तानों ने रखी है। उन्होंने बताया कि हर कप्तान ने टीम में अपनी अलग पहचान और शैली जोड़ी। उन्होंने कहा कि सौरव गांगुली ने भारतीय टीम को नई दिशा दी और खिलाड़ियों में आत्मविश्वास भरा। इसके बाद एमएस धोनी ने शांत और संयमित नेतृत्व से टीम को कई बड़ी सफलताएं दिलाईं। फिर विराट कोहली ने टीम में आक्रामकता और फिटनेस का नया स्तर स्थापित किया। सूर्यकुमार ने कहा कि इसके बाद रोहित शर्मा ने खिलाड़ियों के साथ संवाद और समर्थन की संस्कृति को मजबूत किया। उन्होंने कहा, 'इन सभी कप्तानों की अलग-अलग शैली रही है और भारतीय क्रिकेट को उससे काफी फायदा हुआ है। आज हम जो हासिल कर रहे हैं, वह पहले रखी गई उसी नींव का परिणाम है।'
 
सीनियर खिलाड़ियों ने निभाई अहम भूमिका

सूर्यकुमार यादव ने यह भी माना कि युवा टीम होने के बावजूद सीनियर खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में टीम का मजबूत सहारा बने रहे। उन्होंने विशेष रूप से जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल और हार्दिक पांड्या की तारीफ की। सूर्यकुमार ने कहा, 'मैं युवाओं का श्रेय कम नहीं करना चाहता, लेकिन बुमराह, अक्षर और हार्दिक जिस तरह पूरे टूर्नामेंट में मेरे साथ खड़े रहे, वह काबिल-ए-तारीफ है।'
 
रिकॉर्ड जीत प्रतिशत पर भी बोले कप्तान

सूर्यकुमार यादव के कप्तान बनने के बाद भारतीय टीम ने 52 में से 42 मैच जीते हैं, जो एक शानदार रिकॉर्ड है। इस पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, 'स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई में जो प्रतिशत पाने की कोशिश करता था, वह अब क्रिकेट में मिल रहा है। वहां 50-60 प्रतिशत भी पार नहीं कर पाता था, लेकिन यहां अच्छा लग रहा है।' उन्होंने कहा कि इस सफलता का सबसे बड़ा कारण टीम का एकजुट होकर काम करना है। कप्तान ने कहा, 'अगर ड्रेसिंग रूम में सभी खिलाड़ी एक ही दिशा में सोचें और उसी लक्ष्य के लिए काम करें, तभी इस तरह की सफलता मिलती है।'
 
कप्तान के तौर पर शांत स्वभाव का राज

मैदान पर हमेशा मुस्कुराते रहने और कभी गुस्सा न करने की अपनी आदत पर भी सूर्यकुमार ने खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह शैली रोहित शर्मा से सीखी है। सूर्यकुमार ने कहा, 'मैंने रोहित भाई के साथ खेलते हुए देखा कि वह कभी ज्यादा गुस्सा नहीं होते थे। वह हमेशा खिलाड़ियों को समझते थे। अगर टीम में डर का माहौल होगा तो आप खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं निकलवा सकते।'

———————–
📝 Disclaimer

The content of this post is not originally published by us. The news and information provided here are sourced from trusted online sources, including NewsOnline.co.in
. We share this content only for informational and educational purposes. All rights to the original content belong to their respective owners. If you are the original author or copyright holder and wish to have this content removed or modified, please contact us, and we will take immediate action.

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Javed Khan on Supporting the Next Phase of Global Brokerage and Fintech Growth

London / Dubai / India — August 2026: The...

Preeti Sharma’s Nook & Hire and the Rise of AI-Powered Talent Management

The workplace is changing, and so is the way...

Plots for Sale in Faridabad: Explore Land Options for Buyers and Investors

Faridabad, August 2026: Buyers searching for Plots for Sale...

Abhiraj Shee’s TCS Mission SDG Journey Highlights Digital Learning and Social Awareness

Abhiraj Shee's profile demonstrates an interesting combination of creative...