स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मामला: टैरिफ के बहाने कई देशों को धमकाने वाले ट्रंप लगा रहे मदद की गुहार

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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शायद ही कोई ऐसा देश हो जिस पर टैरिफ लगाने के बहाने उसे धमकाने की कोशिश न की हो। अब यही ट्रंप इन्ही देशों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। वे एक ऐसा सहयोग चाहते हैं जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए साथ में आए। ताजा घटनाक्रमों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय समूह का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं, जिसमें शामिल देश इस संकरे समुद्री मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अपने युद्धपोत तैनात करेंगे। हालांकि, इस योजना को लेकर अब तक किसी भी देश ने आधिकारिक तौर पर अपनी सहमति नहीं जताई है।
विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया ने इस अभियान में अपने युद्धपोत भेजने की संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन के उच्च अधिकारियों के हवाले से यह संकेत मिल रहे हैं कि व्हाइट हाउस इस सप्ताह के अंत तक इस गठबंधन की घोषणा कर सकता है, लेकिन यह मिशन वास्तविक रूप में कब धरातल पर उतरेगा, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वर्तमान में ईरान ने कथित तौर पर सी-माइन्स और छोटे जहाजों का उपयोग कर इस समुद्री रास्ते को बाधित कर रखा है, जिससे वैश्विक तेल बाजार पर दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका को व्यक्तिगत रूप से इस मार्ग की उतनी आवश्यकता नहीं है, जितनी उन देशों को है जो अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस पर निर्भर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका वर्षों से इस क्षेत्र की रक्षा करता आया है और अब समय आ गया है कि दूसरे देश भी अपनी जिम्मेदारी समझें।
ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के पिछले रवैये पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि जब सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता थी, तब सहयोगी देश हिचकिचा रहे थे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें समर्थन युद्ध जीतने के बाद नहीं, बल्कि चुनौतियों के शुरू होने से पहले चाहिए था। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से आग्रह किया है कि वे अपनी तेल आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए अपने पोत भेजें, जबकि अमेरिका तटरेखा पर अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। बताया जा रहा है कि इन देशों कह दिया है यूएस खुद निपटे।
इस बीच, ऑस्ट्रेलिया ने इस मिशन से दूरी बनाकर अमेरिका की मुश्किलों को थोड़ा बढ़ा दिया है। ऑस्ट्रेलियाई कैबिनेट की सदस्य कैथरीन किंग ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि उनका देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपना जहाज नहीं भेजेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि वह क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया इसमें अपना योगदान नहीं दे रहा है। कई अन्य सहयोगी देशों ने भी इस अपील पर फिलहाल टाल-मटोल का रवैया अपनाया हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एकमात्र संकरा रास्ता है, जहाँ से दुनिया के कुल ऊर्जा व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। भारत जैसे देशों के लिए यह मार्ग और भी संवेदनशील है क्योंकि उसका लगभग 60 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात का भविष्य इसी जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर टिका हुआ है।

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