पाकिस्तान के परमाणु हथियार इजराइल के लिए एक बड़ा खतरा

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यरूशलेम। इजराइल के पूर्व पीएम नफ्ताली बेनेट ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर दिए बयान ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि पाकिस्तान की शहबाज सरकार के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी है। बेनेट ने सीधे तौर पर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को इजराइल के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यरूशलेम में अमेरिकी यहूदी संगठनों के अध्यक्षों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए नफ्ताली बेनेट के बयान ने पाकिस्तान के रक्षा गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बेनेट ने कहा कि क्षेत्र में एक नया और खतरनाक गठबंधन आकार ले रहा है। बेनेट ने दावा किया कि इजराइल के खिलाफ एक नया मोर्चा तैयार हो रहा है, जिसमें तुर्की, कतर, और मुस्लिम ब्रदरहुड शामिल हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस गठबंधन को परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान का समर्थन मिला हुआ है। तुर्की के नेतृत्व में चल रहा यह गठबंधन इजराइल के प्रति शत्रुता को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को ‘खतरनाक विरोधी’ बताते हुए चेतावनी दी कि ‘तुर्की अब नया ईरान’ बनता जा रहा है।
इजराइल से आए इस बयान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को बचाव में आना पड़ा। विदेश कार्यालय की प्रवक्ता ने नफ्ताली बेनेट के बयान को पूरी तरह से ‘अटकलबाजी और अनुमान’ पर आधारित बताया है। प्रवक्ता ने कहा कि हम ऐसे देश के अधिकारी के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे जिसे हम मान्यता तक नहीं देते। यह पूरी तरह से बेतुका बयान है।
इजराइल की इस नाराजगी के पीछे हाल के दिनों में हुए कुछ बड़े रक्षा समझौते हैं। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता’ किया है, जिसके तहत किसी भी देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। सऊदी अरब के पास अथाह पैसा है। तुर्की के पास आधुनिक रक्षा उद्योग और ड्रोन तकनीक है। पाकिस्तान एकमात्र मुस्लिम देश है जिसके पास परमाणु बम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये तीनों ताकतें एक साथ आती हैं, तो यह इजराइल के वर्चस्व के लिए बड़ी चुनौती होगी।
थिंक टैंक के मुताबिक अमेरिका और इजराइल के हितों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण अब ये देश अपने दोस्तों और दुश्मनों की पहचान के लिए नए तंत्र विकसित कर रहे हैं। इजराइल में एक बड़ा धड़ा यह मानता है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार ईरान के संभावित हथियारों से कहीं ज्यादा खतरनाक हैं। इजराइली मीडिया और थिंक टैंक लगातार इस बात को उठाते रहे हैं कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को सऊदी अरब ने ही फंडिंग दी थी, इसलिए संकट की स्थिति में ये हथियार सऊदी अरब के लिए ‘परमाणु छत्र’ का काम कर सकते हैं। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर हमेशा यही कहता आया है कि उसके परमाणु हथियार केवल भारत के खिलाफ रक्षा के लिए हैं, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि जब सऊदी अरब और पाकिस्तान अपने गठबंधन को सार्वजनिक करते हैं, तो वे उन अफवाहों को हवा देते हैं जो पहले केवल बंद कमरों में होती थीं।

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