प्राचीन एलर्स पेड़ के आसपास की मिट्टी में पाई जाती है सैकड़ों फंगस प्रजातियां

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मेलबर्न। चिली के टेम्परेट रेनफॉरेस्ट में खड़े विशाल एलर्स पेड़ों का महत्व केवल उनके ऊपर दिखाई देने वाले हिस्सों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन के नीचे एक विशाल जैविक नेटवर्क को सहारा देते हैं। सैकडों साल पुराने एलर्स के ये पेड़ हजारों सालों से तूफान, आग और बदलते मौसम का सामना करते आए हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया है कि इनके आसपास की मिट्टी में सैकड़ों फंगस प्रजातियां पाई जाती हैं, जो जंगल के लिए बेहद जरूरी काम करती हैं। ये फंगस पौधों तक पानी और पोषक तत्व पहुंचाने, मिट्टी में कार्बन स्टोर करने और पूरे जंगल को पर्यावरणीय तनाव से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
रिसर्च के अनुसार अगर एक हजार साल पुराने पेड़ को काट दिया जाए, तो केवल एक पेड़ नहीं खोता, बल्कि हजारों साल में विकसित हुआ पूरा अंडरग्राउंड इकोसिस्टम भी नष्ट हो जाता है। मेलबर्न यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता केमिली ट्रुओंग बताती हैं कि हर पेड़ समान नहीं होता। बड़े और प्राचीन पेड़ की मिट्टी में छोटी पौधों की तुलना में दोगुनी फंगल विविधता पाई जाती है। जब एक विशाल पेड़ गायब होता है, तो उसके साथ सदियों पुराना वह नेटवर्क भी समाप्त हो जाता है, जो मिट्टी की उपजाऊ शक्ति और जंगल की मजबूती बनाए रखता है। एसपीयूएन की एड्रियाना कोरालेस के अनुसार यह विविधता जंगल की ‘रेजिलिएंस’ या मजबूती को दर्शाती है, जो प्राकृतिक आपदाओं से उबरने में मदद करती है। यह खोज 2022 में चिली के एलर्स कोस्टेरो नेशनल पार्क में शुरू हुई।
शोधकर्ताओं ने 31 अलग-अलग एलर्स पेड़ों के नीचे मिट्टी के सैंपल लिए, जिनमें छोटे पेड़ और ‘एलर्स अबुएलो’ नामक विशाल पेड़ शामिल थे। इस पेड़ का तना 14.8 फीट से अधिक चौड़ा है। वैज्ञानिकों ने डीएनए तकनीक का इस्तेमाल करके मिट्टी में छिपी फंगल प्रजातियों की पहचान की। विश्लेषण में पता चला कि सबसे बड़े पेड़ के पास 300 से अधिक ऐसी फंगल प्रजातियां थीं, जो किसी और पेड़ के पास नहीं मिलीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पुराने पेड़ मिट्टी की जैव विविधता के लिए छाता की तरह काम करते हैं। एलर्स प्रजाति दुनिया की दूसरी सबसे लंबी उम्र वाली पेड़ों में से एक है। सदियों से इनका शिकार मजबूत लकड़ी के लिए किया जाता रहा है। खेती के लिए जंगलों को साफ करना और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियां इन पर लगातार दबाव डाल रही हैं। प्रस्तावित सड़कों और बाहरी प्रजातियों के खतरे से जंगल और इसके भूमिगत नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। नई रिसर्च चेतावनी देती है कि खतरा सिर्फ पेड़ों के नुकसान का नहीं है, बल्कि उस छिपे हुए जैविक खजाने को खोने का भी है, जो जंगल को दोबारा खड़ा करने की ताकत रखता है।
अध्ययन यह बताता है कि हजारों साल पुराने जंगल कभी भी नए लगाए गए पेड़ों से पूरी तरह रिप्लेस नहीं किए जा सकते। हर बड़ा और प्राचीन पेड़ सैकड़ों अनोखी फंगल प्रजातियों का आश्रय है, और इसे बचाना पूरे भूमिगत इकोसिस्टम को संरक्षित करने के बराबर है। इस खोज ने साबित कर दिया है कि पुराने पेड़ केवल वनस्पति नहीं बल्कि पूरे जंगल की नींव हैं। उनका संरक्षण न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से बचाने और जंगल की मजबूती बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।

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