यूरोप में बहुत तेजी से घट रही आबादी, 2100 तक कोलैप्स कर जाएगी जनसंख्या

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नई दिल्ली. यूरोप (Europe) अब ‘बूढ़ा’ (‘old man’) हो रहा है. इटली, पोलैंड और स्पेन जैसे देशों में लोग इतनी तेजी से कम हो रहे हैं कि साल 2100 से पहले ही पूरी आबादी (population) आधी रह जाएगी. यह कोई दूर की बात नहीं है – अभी से गांव खाली हो रहे हैं. घर बिक नहीं रहे और युवा दूसरे देशों में नौकरी ढूंढने भाग रहे हैं. जन्म दर बहुत कम हो गई है.

बुजुर्ग ज्यादा हैं और माइग्रेशन से भी मदद नहीं मिल रही. अगर पेंशन देने के पैसे खत्म हो गए तो अर्थव्यवस्था बर्बाद हो सकती है. स्पेन में तो 2024 में जन्म का आंकड़ा सबसे कम हो गया – सिर्फ 3 लाख 18 हजार 5 बच्चे पैदा हुए, जो 1941 से अब तक का सबसे निचला स्तर है.

स्पेन में 2024 का जन्म आंकड़ा चौंकाने वाला है…

कुल बच्चे: 3,18,005 – सबसे कम का रिकॉर्ड.
देशी स्पेनियों के बच्चे बहुत कम हो गए, जबकि हर 3 में से 1 बच्चा विदेशी मां से पैदा हुआ.
प्राकृतिक रूप से आबादी घटी: 1.16 लाख से ज्यादा लोग कम हुए (जन्म से ज्यादा मौतें).
पिछले 10 साल में देशी जन्म दर 25.6% गिर गई.
मां बनने की औसत उम्र: 33.2 साल.
हर औरत औसतन सिर्फ 1.10 बच्चे पैदा कर रही है, जबकि आबादी स्थिर रखने के लिए कम से कम 2.1 बच्चे जरूरी हैं.

स्पेन में कोई ठोस नीति नहीं है जो जन्म दर बढ़ाए. सरकार ने कुछ मदद दी है जैसे बच्चे पैदा करने पर छुट्टी या पैसे, लेकिन यह काफी नहीं है. नतीजा यह है कि स्पेन बूढ़ा हो रहा है. गांव खाली हैं. अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ रहा है.

पूरे यूरोप में यह समस्या क्यों फैल रही है?
इटली में भी जन्म दर 1.2 है. पोलैंड में 1.3 – सभी जगह एक जैसी हालत. दक्षिणी और पूर्वी यूरोप में शहरों से लोग भाग रहे हैं. युवा जर्मनी या अमेरिका जैसे देशों में जा रहे हैं जहां नौकरियां बेहतर हैं. अब वैज्ञानिक कारण समझते हैं कि जन्म दर क्यों इतनी कम हो गई है. यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) नाम की वैज्ञानिक प्रक्रिया का नतीजा है.

आर्थिक दबाव (Economic Pressure): यूरोप में जीवन बहुत महंगा है. घर खरीदना, बच्चे पालना, स्कूल की फीस – सब कुछ बहुत खर्चीला. महिलाएं अब पढ़ाई और नौकरी पर ध्यान देती हैं, इसलिए शादी और बच्चे देर से होते हैं. वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि जब GDP (देश की कमाई) बढ़ती है, तो लोग छोटा परिवार पसंद करते हैं क्योंकि बच्चे महंगे हो जाते हैं. स्पेन में बेरोजगारी ज्यादा है, इसलिए युवा बच्चे पैदा करने से डरते हैं.

सामाजिक बदलाव (Social Changes): महिलाएं अब पुरुषों की तरह काम कर रही हैं. शिक्षा और करियर पहले आता है. औसतन शादी 30 साल की उम्र के बाद होती है. विज्ञान कहता है कि महिलाओं की उम्र बढ़ने से प्रजनन क्षमता (Fertility) कम होती है. 35 साल बाद गर्भधारण मुश्किल हो जाता है क्योंकि अंडों की गुणवत्ता घटती है. यूरोप में तलाक ज्यादा हैं. सिंगल पैरेंट्स बढ़ रहे हैं, जो बच्चे पैदा करने को और मुश्किल बनाता है.

बुजुर्ग आबादी (Aging Population): पहले जन्म दर ज्यादा थी, इसलिए अब बुजुर्ग ज्यादा हैं. लेकिन युवा कम हैं जो उन्हें पेंशन दें या देखभाल करें. यह जनसांख्यिकीय पिरामिड (Population Pyramid) को उलटा कर देता है – नीचे कम युवा, ऊपर ज्यादा बुजुर्ग. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर जन्म दर 2.1 से कम रहती है, तो आबादी खुद-ब-खुद घटती जाती है. यूरोप में यह 1.5 के आसपास है.

सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारण (Cultural and Environmental Factors): लोग अब पर्यावरण बचाने के लिए कम बच्चे चाहते हैं. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से डर है कि ज्यादा आबादी संसाधन खत्म कर देगी. साथ ही, मोबाइल और सोशल मीडिया से जीवन व्यस्त हो गया, रिश्ते कम मजबूत हैं. अध्ययन दिखाते हैं कि यूरोप में शून्य बच्चा (Childfree) जीवनशैली रही है.

प्रवास की कमी (Lack of Migration): पहले अफ्रीका या एशिया से लोग आते थे, लेकिन अब सख्त कानून हैं. स्पेन में विदेशी मां से बच्चे बढ़ रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह कमी पूरी नहीं कर पा रहा. वैज्ञानिक कहते हैं कि बिना माइग्रेशन के आबादी घटना तय है.

क्या असर होंगे?
यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं – अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा. कम युवा मतलब कम काम करने वाले, कम टैक्स और पेंशन के लिए पैसे की कमी. स्कूल बंद हो जाएंगे. अस्पतालों में स्टाफ कम होगा. इटली में पहले से गांव बिक रहे हैं क्योंकि कोई रहने वाला नहीं. पोलैंड में युवा जर्मनी भाग रहे हैं.

अगर अब नीतियां नहीं बनीं – जैसे बच्चे पैदा करने पर ज्यादा मदद, सस्ता घर, मुफ्त चाइल्डकेयर – तो उलटा करना मुश्किल होगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि रोबोट या AI मदद कर सकते हैं, लेकिन इंसान की जगह नहीं ले सकते.

यूरोप को अब सोचना होगा कि कैसे युवा रखें और जन्म दर बढ़ाएं. स्पेन की सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन वे कमजोर हैं. दुनिया के अन्य देश जैसे भारत या अफ्रीका में आबादी बढ़ रही है, लेकिन यूरोप का संकट अलग है.

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