अहमदाबाद में टीम इंडिया ने अचानक क्यों बदला होटल? सूर्यकुमार यादव ने खोला राज

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भारत ने तीसरी बार टी20 विश्वकप जीत लिया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल से पहले कई बातें कही जा रही थीं। सोशल मीडिया पर फैंस इसी मैदान पर 2023 के फाइनल में मिली हार को भी याद कर रहे थे। हालांकि, टीम इंडिया ने सभी बुरी यादों को पीछे छोड़ते हुए अहमदाबाद में जीत हासिल की और जीत की नई और खुशी देने वाली कहानी लिखी। हालांकि, अब खुलासा हुआ है कि टीम इंडिया भी अहमदाबाद की बुरी यादों से विचलित थी। इसी कड़ी में भारतीय टीम ने होटल भी बदला था। अब इसकी पूरी कहानी का खुलासा कप्तान सूर्यकुमार यादव ने किया है। सूर्यकुमार ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में खुलासा किया कि किसी के सुझाव पर टीम ने अपना होटल बदल लिया था, ताकि जीत के लिए अपनी कोशिशों में कोई कसर न छोड़ी जाए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, छह मार्च को यह बात सामने आई थी कि भारतीय टीम ने अहमदाबाद में अपना होटल बदल दिया है। इसके पीछे की वजह का खुलासा तब नहीं हुआ था। हालांकि, ऐसा कहा गया कि टीम पहले जिस होटल में ठहरी थी, उसी दौरान भारत को दो बड़े मैचों में हार मिली थी। इनमें 2023 वनडे विश्व कप का फाइनल और इसी साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सुपर आठ का मैच शामिल है। इसी कारण टीम प्रबंधन ने फाइनल से पहले होटल बदलने का फैसला किया। टी20 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार ने भी इसी तरह के एक अंधविश्वास का खुलासा किया, जिसने इंग्लैंड के खिलाफ हाई-प्रेशर सेमीफाइनल में भारत की जीत में मदद की और अंततः टीम को विश्व कप खिताब दिलाने में भूमिका निभाई।

चंद्र ग्रहण के बुरे असर से बचने के लिए ट्रेनिंग सत्र भी देर से किया था शुरू

भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करने के लिए जी-जान लगा दी, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन इसके साथ ही एक 'गुड लक' फैक्टर भी था, जो मानो सूर्यकुमार यादव और उनकी टीम के पक्ष में काम करता दिखा। टीम से जुड़े एक सदस्य ने यह भी बताया था कि टीम जहां-जहां मैच खेलने गई, वहां भगवान का आशीर्वाद भी लिया गया। सेमीफाइनल से पहले मुंबई में चंद्र ग्रहण के बुरे असर से बचने के लिए भारतीय टीम ने अपना ट्रेनिंग सत्र को करीब एक घंटे देर से शुरू किया था।मान्यता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान किए जाने वाले कामों को अशुभ माना जाता है। एक सूत्र ने इंडियन एक्स्प्रेस से इसकी पुष्टि करते हुए बताया था, 'टीम को पता चला कि चंद्र ग्रहण है, इसलिए इस दौरान कोई शुभ काम करने से बचना चाहिए। चूंकि भारत को इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल खेलना था, इसलिए टीम सकारात्मक शुरुआत करना चाहती थी। कई लोगों का मानना था कि अभ्यास का समय शाम 6:40 बजे के बाद कर देना चाहिए। टीम मैनेजमेंट ने भी इस पर सहमति जताई और अभ्यास सत्र को एक घंटे के लिए टाल दिया गया।'

क्यों बदला था होटल?

अब कप्तान सूर्यकुमार यादव ने खुलासा किया है कि टीम ने होटल बदलने का फैसला इसलिए लिया था, ताकि किसी भी तरह की संभावना को अधूरा न छोड़ा जाए। होटल बदलने पर सूर्यकुमार ने कहा कि सेमीफाइनल मैच से पहले ही यह फैसला ले लिया गया था। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'हम सेमीफाइनल के लिए वानखेड़े जा रहे थे, तभी फ्लाइट में किसी ने सुझाव दिया कि होटल बदलकर देखना चाहिए। कई टीमों ने ऐसा किया है। हम अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने के लिए कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहते थे। अगर वहां से किसी टीम को जीत मिली है, तो क्यों न हम भी कोशिश करें।' अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि भारतीय टीम ने सेमीफाइनल से पहले मुंबई में होटल बदला था या नहीं, लेकिन सूर्यकुमार की बातों से ऐसा लग रहा है कि टीम इंडिया ने मुंबई में भी ऐसा किया था। खैर इसके बाद टीम इंडिया ने सेमीफाइनल में वानखेड़े में इंग्लैंड के खिलाफ करीबी जीत हासिल की और फिर अहमदाबाद में फाइनल भी जीता और विश्व चैंपियन बने।

नरेंद्र मोदी स्टेडियम पर बोले सूर्यकुमार

सूर्यकुमार यादव ने अहमदाबाद के प्रतिष्ठित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेलने से जुड़े तथाकथित 'जिंक्स' पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, 'लोग कह रहे थे कि भारत अहमदाबाद में नहीं जीतता, खासकर 2023 के फाइनल के बाद। लेकिन अब देखिए क्या हुआ। हमने उसी स्टेडियम में जीत हासिल की है। अब हमें पता चल गया है कि स्टेडियम में कोई समस्या नहीं है।'

खेल और अंधविश्वास का रिश्ता पुराना

खेल और अंधविश्वास का रिश्ता काफी पुराना रहा है। कई क्रिकेटर लंबे समय से किसी न किसी तरह के अंधविश्वास या खास रूटीन पर भरोसा करते रहे हैं। महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर मैच से पहले हमेशा अपना बायां पैड पहले पहनते थे और कई बार अहम मौकों पर मैच देखने से भी बचते थे। वहीं पूर्व कप्तान कपिल देव अक्सर भगवान शिव के लॉकेट वाली चेन पहनकर मैदान में उतरते थे। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया के स्टार बल्लेबाज स्टीव स्मिथ के बारे में भी कहा जाता है कि अगर वह टेस्ट मैच की पहली पारी में बल्लेबाजी नहीं करते, तो उन्हें ठीक से नींद नहीं आती। ऐसे कई उदाहरण हैं, जब खिलाड़ियों ने किसी अंधविश्वास या खास रूटीन पर भरोसा किया है, जो उन्हें मानसिक रूप से सहज और केंद्रित रहने में मदद करता है।

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