पावरप्ले में ‘पावर’ गायब!: टीम इंडिया की ओपनिंग जोड़ी क्यों हो रही फेल? पांच मैचों में सिर्फ 34 रन की साझेदारी

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टीम इंडिया के लिए ओपनिंग जोड़ी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई है। रविवार को नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले जा रहे मुकाबले में भी भारत की सलामी जोड़ी ने फैंस को निराश किया। भारत को टी20 वर्ल्ड कप के पांच मुकाबलों में सलामी जोड़ी ने महज 34 रन दिलाए हैं। इनमें चार मैचों में ईशान-अभिषेक की जोड़ी और एक मैच में ईशान-सैमसन की जोड़ी शामिल है। नामीबिया के खिलाफ अभिषेक नहीं खेले थे और सैमसन ने ओपनिंग की थी।

ईशान-अभिषेक का जादू नहीं चल रहा

दक्षिण अफ्रीका से मिले 188 रनों के लक्ष्य का पीछा करने के लिए अभिषेक शर्मा और ईशान किशन की ओपनिंग जोड़ी मैदान पर उतरी। हालांकि, ईशान की पारी का अंत सिर्फ चार गेंदों में हो गया और भारतीय टीम की सलामी जोड़ी स्कोरबोर्ड पर एक रन भी नहीं लगा सकी। विकेटकीपर-बल्लेबाज बिना खाता खोले पवेलियन लौटा। वहीं, अभिषेक 15 रन बनाकर आउट हुए। यह हाल सिर्फ इस मैच का नहीं है, बल्कि अब तक खेले गए पांच मुकाबलों में भारत की सलामी जोड़ी का यही हश्र रहा है। आइए जानते हैं…अमेरिका के खिलाफ टूर्नामेंट के पहले मैच में अभिषेक और ईशान किशन पारी का आगाज करने मैदान पर उतरे थे। हालांकि, यह साझेदारी सिर्फ आठ रनों तक ही चल सकी और अभिषेक बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए थे।नामीबिया के खिलाफ अभिषेक के बीमार होने की वजह से ईशान किशन को संजू सैमसन के रूप में नया जोड़ीदार मिला था। हालांकि, नतीजा कुछ खास नहीं रहा। ईशान ने तो इस मैच में 61 रन जड़े, लेकिन संजू आठ गेंदों में 22 रन बनाने के बाद चलते बने। नतीजा यह हुआ कि भारत की ओपनिंग साझेदारी 25 के स्कोर पर टूट गई।पाकिस्तान के खिलाफ अभिषेक शर्मा प्लेइंग इलेवन में लौटे और वह ईशान किशन के साथ पारी का आगाज करने उतरे। इस बार टीम इंडिया की सलामी जोड़ी महज एक रन बनाकर टूट गई। ईशान ने तो ताबड़तोड़ अंदाज में खेलते हुए 40 गेंदों में 77 रन बनाए, लेकिन अभिषेक बिना खाता खोले आउट हुए।ओपनिंग साझेदारी के विफल होने की कहानी नीदरलैंड के खिलाफ भी नहीं बदली। अभिषेक और ईशान ने मिलकर पहले विकेट के लिए एक रन तक नहीं जोड़ सके। अभिषेक जीरो पर आउट हुए, जबकि ईशान 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे।अगर सिर्फ ईशान और अभिषेक की जोड़ी की बात करें तो इन दोनों ने इस टी20 विश्वकप में चार मैचों में सिर्फ नौ रन की साझेदारी की है। एक में सैमसन और ईशान ने 25 रन की ओपनिंग साझेदारी की थी।

क्या एकसाथ नहीं जम पा रहे ईशान-अभिषेक?

सलामी जोड़ी के लगातार नाकाम होने से भारतीय टीम की चिंता बढ़ गई है। टीम इंडिया को अगर अपनी ही सरजमीं पर खिताब का बचाव करना है, तो अभिषेक और ईशान की जोड़ी को आने वाले मैचों में ज्यादा जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करनी होगी। यह इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि अभिषेक ने पिछले साल दिसंबर तक या तो संजू सैमसन और या फिर शुभमन गिल के साथ ही ओपनिंग की है।

क्या सैमसन की वापसी होनी चाहिए?

जनवरी में ईशान किशन ने वापसी की तो उन्हें तीसरे या फिर चौथे नंबर पर भेजा गया। जब आपकी तैयारी कुछ उस तरह की रही हो और ऐन मौके पर टीम मैनेजमेंट जोड़ी बदल दे तो भी ध्यान भंग हो सकता है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट को भी इस पर विचार करना चाहिए कि क्या संजू को वापस लाकर ईशान को तीसरे नंबर पर खिलाना चाहिए? ऐसे में रिंकू को बेंच पर बैठाना पड़ सकता है। सही प्लेइंग-11 चुनने में थोड़ी भी देरी या चूक टीम इंडिया पर भारी पड़ सकती है।

2024 से तुलना करें तो…

साल 2024 में जब भारत ने टी20 विश्वकप का खिताब जीता था, तब टीम के लिए ओपनिंग कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली कर रहे थे। ओपनिंग की जिम्मेदारी दो ऐसे खिलाड़ियों पर थी जो उस संस्करण से पहले लगभग हर टी20 विश्वकप खेल चुके थे (विराट 2007 में टीम का हिस्सा नहीं थे)। हालांकि, 2024 में भी भारत की ओपनिंग की कहानी कुछ ऐसी ही रही थी। शुरुआती पांच मुकाबलों को मिलाकर रोहित और कोहली ने मिलाकर महज 85 रन जोड़े थे।
 
आयरलैंड के खिलाफ 16 गेंद में 22 रन की साझेदारी।
पाकिस्तान के खिलाफ नौ गेंद में 12 रन की साझेदारी।
अमेरिका के खिलाफ दो गेंद में एक रन की साझेदारी।
अफगानिस्तान के खिलाफ 17 गेंद में 11 रन की साझेदारी।
बांग्लादेश के खिलाफ 22 गेंद में 39 रन की साझेदारी।

2024 में टीम इंडिया का संयोजन

तब भी रोहित कुछ मैचों में रन बना रहे थे, लेकिन विराट के बल्ले से रन नहीं निकल रहे थे। हालांकि, ओपनिंग की विफलता मध्यक्रम के बल्लेबाज संभाल रहे थे, क्योंकि तब भारत के पास प्लेइंग-11 में दाएं हाथ और बाएं हाथ के बल्लेबाजों का अच्छा मिश्रण था। रोहित प्लेइंग-11 में ज्यादा प्रयोग और छेड़छाड़ के लिए नहीं जाने जाते थे। अगर कोई खिलाड़ी चोटिल न हुआ हो तो वह उसी प्लेइंग-11 के साथ अगले मैच में जाने पर विश्वास रखते थे। तब ओपनिंग में विराट और रोहित (दोनों दाएं हाथ) के अलावा मध्य्क्र में सूर्यकुमार (दाएं हाथ), ऋषभ पंत और शिवम दुबे (दोनों बाएं हाथ) थे।अक्षर पटेल को फ्लोटर (बाएं हाथ के) के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। फिर फिनिशर के तौर पर हार्दिक पांड्या (दाएं हाथ के) शामिल थे। यानी तब टीम इंडिया में चार दाएं हाथ के और तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज थे। इससे विपक्षी टीमों को परेशानी हो रही थी। रोहित और कोहली टीम के दो सबसे ताकतवर बल्लेबाज थे। एक का काम खेल को संभालना और दूसरे का हिट करना था। यह विश्वास था कि एक अगर नहीं चला तो दूसरा अनुभवी संभाल लेगा।2026 में भारत के पास छह बाएं हाथ के बल्लेबाज रोहित पूरे टूर्नामेंट में अच्छी पारी खेलते रहे, लेकिन फाइनल में नहीं चले। तब विराट कोहली ने अर्धशतक लगाकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। रोहित और कोहली एक दूसरे की कमी को पूरा करते दिख रहे थे। हालांकि, ईशान और अभिषेक के संदर्भ में ऐसा होता नहीं दिख रहा है। इस बार यानी 2026 की टी20 विश्वकप टीम में छह बाएं हाथ के और दो दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। इससे विपक्षी टीम को रणनीति बनाने में आसानी हो रही है।

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